पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश में हिम तेंदुआ के मिले साक्ष्य | WWF India

पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश में हिम तेंदुआ के मिले साक्ष्य

Posted on
05 October 2017
अरुणाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्र में मिला दुर्लभ हिम तेंदुए के होने का प्रमाण 
 
नई दिल्ली: डब्लूडब्लूएफ-इंडिया द्वारा हिम-तेंदुए पर किये गए हालिया अध्ययन में जैव विविधताओं से समृद्ध और बड़े स्तर पर अनन्वेषित अरुणाचल प्रदेश में इस दुर्लभ प्रजाति के होने के साक्ष्य तस्वीरों में मिले हैं। यह प्रमाण महत्वपूर्ण है क्यूंकि अरुणाचल प्रदेश राज्य का एक बड़ा प्राकृतिक क्षेत्र स्थानीय समुदायों के संरक्षण में है जिनका सहयोग इस प्रजाति और उसके प्राकृतिक-वास को बचाने के लिए अहम है। 
 
राज्य के सामुदायिक संरक्षित क्षेत्रों में से एक, थेंबांग में लगाए गए एक कैमरे से इस प्रजाति की तस्वीर ली गयी।  हिम-तेंदुए के प्राकृतिक-वास का केवल एक आंशिक हिस्सा राज्य के दो संरक्षित क्षेत्रों - दिबांग जैवमंडल रिज़र्व और नमदाफा राष्ट्रीय उद्यान - में पड़ता है।  इन संरक्षित क्षेत्रों से परे असंरक्षित छेत्रों मे हिम-तेंदुओं की मौजूदगी संरक्षण के लिए सामुदायिक सहयोग के साथ-साथ भूदृश्य श्रेणी संरक्षण नियोजन की महत्ता को भी रेखांकित करती है।  मार्च २०१७ से अरुणाचल प्रदेश वन विभाग ने डब्लूडब्लूएफ-इंडिया के सहयोग से शुरू किये गए राज्यव्यापी सर्वेक्षण असंरक्षित इलाकों पर केंद्रित किया गया जो आज भी अछूते हैं। 
श्री ओमकार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व प्रधान सचिव, पर्यावरण एवं वन विभाग, अरुणाचल प्रदेश सरकार, ने कहा, " यह, शायद, पहली बार है जब अरुणाचल प्रदेश राज्य में तस्वीर के माध्यम से हिम-तेंदुए होने की खबर मिली है।  इस सर्वेक्षण के परिणाम इस क्षेत्र की विशेष प्रजाति के लिए संरक्षण योजनाओं को विकसित करने में मददगार होंगे और हमारे संरक्षण प्रयासों को मज़बूत करेंगे। "
 
यह अध्ययन हिम-तेंदुओं और अन्य बड़े स्तनधारियों के मौजूदा वितरण के बारे में समुदाय के सदस्यों की जानकारी पर आधरित था। शोधकर्ताओं, जिनमें प्रशिक्षित स्थानीय युवक शामिल थे, चरवाहों और शिकारी रह चुके लोगों का साक्षात्कार किया जिन्होंने राज्य में हिम-तेंदुओं और उनके द्वारा शिकार किये जाने वाली प्रजातियों के बारे में विस्तृत जानकारी मुहैया कराई।  साक्षात्कार में शामिल हुए 80 प्रतिशत से ज़्यादा लोगों ने उनके क्षेत्रो में हिम-तेंदुएं की मौजूदगी की पुष्टि की जो  राज्य के लिए उत्साहजनक संकेत है।  शोधकर्ताओं के दल ने कथित मौजूदगी को प्रमाणित करने के लिए चुनिंदा क्षेत्रों में कैमरे लगाए और उन्हें सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र में हिम-तेंदुए की तस्वीर मिली।
 
अरुणाचल प्रदेश में  डब्लूडब्लूएफ-इंडिया द्वारा किया गया राज्य-व्यापी सर्वेक्षण महत्वपूर्ण है क्यूंकि यह वैश्विक हिम -तेंदुआ पर्यावास संरक्षण कार्यक्रम के 22 प्राथमिक भू-क्षेत्रों में से एक को कवर करता है।  इस राज्य-व्यापी सर्वेक्षण के नतीजे अरुणाचल प्रदेश वन विभाग को ऐसी हिम-तेंदुआ संरक्षण योजना तैयार करने में मदद करेंगे जिससे प्रतिकार मौतें, बुनियादी संरचानों का विकास और जलवायु परिपर्तन से प्राकृतिक- वासों पर पड़ने वाले असर जैसी बढ़ती चुनौतियों का सामना किया जा सके।  
 
श्री ऋषि कुमार शर्मा, वरिष्ठसंयोजक, प्रजाति और भू-दृश्य कार्यक्रम, डब्लूडब्लूएफ-इंडिया, ने बताया, " इस महत्वाकांक्षी सर्वेक्षण से पूरे अरुणाचल प्रदेश में हिम -तेंदुओं और उनके द्वारा शिकार किये जाने वाली प्रजातियों के वितरण के बारे में हमारी जानकारी में काफी वृद्धि हुई है और इससे इन प्रजातियों के संरक्षण - प्रबंधन में बेहद मदद मिलेगी। "
 
संरक्षण के लिए सामुदायिक प्रबंधन का निर्माण डब्लूडब्लूएफ-इंडिया के सारे संरक्षण कार्यक्रमों के मुख्य केंद्र बिंदुओं में से एक रहा है।  2004 में, डब्लूडब्लूएफ-इंडिया ने अरुणाचाल प्रदेश में सामुदायिक संरक्षित क्षेत्रों की संकल्पना को प्रस्तुत किया जिसके तहत स्थानीय समुदायों को संरक्षण कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सक्रिय निर्णय लेने के लिए सशक्त किया जाता है और इससे वन्य जीव और मनुष्यों दोनों को लाभ मिलता है।  इन सामुदायिक संरक्षित क्षेत्रों मे स्थानीय समुदायों ने वन्यजीवों की निगरानी, रक्षा और समुदाय आधारित पर्यटन गतिविधियों के लिए समितियों का गठन किया है।
   
राज्य में एक दशक से चल रहे समुदाय संरक्षण के माध्यम से संरक्षण प्रयासों के बारे में बताते हुए, श्री रवि सिंह, डब्लूडब्लूएफ-इंडिया के महासचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ने कहा, " राज्य व्यापी सर्वेक्षण के माध्यम से हिम-तेंदुओं के वितरण के बारे में मिली वैज्ञानिक जानकारी डब्लूडब्लूएफ-इंडिया और अरुणाचल प्रदेश वन विभाग के लिए एक उत्साहजनक संकेत है।  हम स्थानीय समुदायों की सहभागिता की सराहना करते है जो कि राज्य मे हमारे संरक्षण प्रयासों के संचालक हैं।"
 
(See attached file: Camera trap image of snow leopard from western Arunachal Pradesh; Copyright-Arunachal Pradesh Forest Deptt and WWF-India.jpg)
 
विस्तृत जानकारी के लिए - 
 ऋषि कुमार सिंह, वरिष्ठसंयोजक, प्रजाति एवं भू-दृश्य कार्यक्रम 
ईमेल: rksharma@wwfindia; फोन: 011-41504782 
 
रितुपर्णा सेनगुप्ता, वरिष्ठप्रबंधक, प्रचार, ब्रांड एवं मीडिया 
ईमेल: rsengupta@wwfindia.net; फोन: 011-41504797 
 
इंदिरा अकोईजम; प्रबंधक, संचार, प्रजाति एवं भू-दृश्य कार्यक्रम 
ईमेल:iakoijam@wwfindia.net; फोन: 011-41504783

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